इतनी बातें दिमाग में
फालतू और काम की
इन तमाम बातों में
खो गयी है ज़िन्दगी
जी रहा हूँ एक दिन
जी रहा हूँ एक रात
एक दिन और एक रात में
कट रही है ज़िन्दगी
कारवा और महफिले
हैं और रहेंगे मेरे बाद भी
एक बार एक बार
एक बार मेरी ज़िन्दगी
रेत भरी मुठ्ठी है
कस रहा हूँ जोर से
जीने की तीव्र चाह में
मर रही है ज़िन्दगी