Thursday, August 27, 2009

जिंदगी

सदमे बहुत है जिंदगी
पर मज़ा है जिंदगी

दिखती है वैसी देखो जैसी
रंग बदलती जिंदगी

दिनों रातो और पलों में
जियो जियो जिंदगी

रुक न जाना थम न जाना
चलो चलो है जिंदगी

खुश भी हूँ हैरान भी
तू पहेली जिंदगी

Monday, July 13, 2009

मर रही है ज़िन्दगी

इतनी बातें दिमाग में
फालतू और काम की
इन तमाम बातों में
खो गयी है ज़िन्दगी

जी रहा हूँ एक दिन
जी रहा हूँ एक रात
एक दिन और एक रात में
कट रही है ज़िन्दगी

कारवा और महफिले
हैं और रहेंगे मेरे बाद भी
एक बार एक बार
एक बार मेरी ज़िन्दगी

रेत भरी मुठ्ठी है
कस रहा हूँ जोर से
जीने की तीव्र चाह में
मर रही है ज़िन्दगी

Thursday, July 9, 2009

हमदम

जब तेरी बात चली है हमदम,
भरी दुपहरी में बरसात हुई है हमदम

कुछ और मांगने को हाथ उठते ही नही,
तू मुझे जब से मिला है ए मेरे हमदम

Thursday, June 4, 2009

मर जाएँगे?

जिंदगी कैसे कटती जाती है
कभी कभी तो आत्मा सिहर सी जाती है
क्या इसी तरह एक दिन
हाथो में कुछ लिए बिन
चले जाएँगे
साला मर जाएँगे?

Wednesday, June 3, 2009

दिल की धड़कने इन दिनों

दिमाग खाली भी और भरा भी
न जाने क्या हो रहा है इन दिनों

दिन भी कट जाता है
रात भी निकल ही जाती है
दिनों और रातो में
ज़िन्दगी गूम इन दिनों

नदारद ख्वाब है और
दिल में अरमा भी नदारद है
सुनी सुनी सहमी सहमी
दिल की धड़कने इन दिनों

Thursday, May 14, 2009

दोस्त नही मिलते इन दिनों

दोस्त नही मिलते इन दिनों
दिल नही खिलते इन दिनों
ऐसा क्या है जो खो गया है
ढूंढता रहता हूँ जो मै इन दिनों

लोग कैसे सोच लेते है
देख लेते है भविष्य को
आज की गफलत में उलझा
उलझा रहता हूँ इन दिनों

लोग कैसे महफिलों में
मिलते भी है और हँसते भी है
मै भरी महफिल में भी
तनहा रहता हूँ इन दिनों

Wednesday, May 13, 2009

बच्चे मेरे

बच्चे मेरे
तू मेरी गोद में
आया कहा से?
ये प्यारा सा
संसार मैंने
पाया कहा से?



क्या करू कुछ समझ नही आता

क्या करू कुछ समझ नही आता

चलु या ठहर के साँस ले लू मै ज़रा

ज़िन्दगी ऐक अनजान से मोड़ पर है

किधर जाऊँ ना जाऊँ सोच नही पाता

आज उठा हर कदम कल दस्तक देगा

आज लिया हर फ़ैसला कल प्रश्न करेगा

दस्तको और प्रश्नों में ही उलझ जाऊंगा

मै जीवन को जी नही पाउँगा

किसी की मोहब्बत का हश्र यु तो ना हुआ होगा

किसी की मोहब्बत का हश्र यु तो ना हुआ होगा
के हम चाहते रहे उसी को और कह भी नही पाये

खुदा करे दुवा मेरी बारयाब हो जाए
जिस पल भूला दू उसको मेरा दम निकल जाए

उम्र गुज़री है मेरी उसको यादो में
अब तो खुल के मेह बरसे अब तो ख़ुद चले आए

'जानी' मै रात दिन उस पल को ढूंढता हूँ
जब आए वो अपनी मर्ज़ी और मेरी मर्ज़ी जाए

अब तो अरसा हुआ हम उस गली को छोड़ आए
न हम उधर गए न वो इधर आए

Tuesday, May 12, 2009

सारे वक्त बीत जाते है

सारे वक्त बीत जाते है
चंद लम्हे रह जाते है
जो ता-उम्र दिल के किसी कौने में
बस से जाते है, ठहर से जाते है

उनको जाता देख
येही सोच रहा हूँ
वो मेरी जान लेकर
हस के किधर जाते है