दोस्त नही मिलते इन दिनों
दिल नही खिलते इन दिनों
ऐसा क्या है जो खो गया है
ढूंढता रहता हूँ जो मै इन दिनों
लोग कैसे सोच लेते है
देख लेते है भविष्य को
आज की गफलत में उलझा
उलझा रहता हूँ इन दिनों
लोग कैसे महफिलों में
मिलते भी है और हँसते भी है
मै भरी महफिल में भी
तनहा रहता हूँ इन दिनों
Thursday, May 14, 2009
Wednesday, May 13, 2009
क्या करू कुछ समझ नही आता
क्या करू कुछ समझ नही आता
चलु या ठहर के साँस ले लू मै ज़रा
ज़िन्दगी ऐक अनजान से मोड़ पर है
किधर जाऊँ ना जाऊँ सोच नही पाता
चलु या ठहर के साँस ले लू मै ज़रा
ज़िन्दगी ऐक अनजान से मोड़ पर है
किधर जाऊँ ना जाऊँ सोच नही पाता
आज उठा हर कदम कल दस्तक देगा
आज लिया हर फ़ैसला कल प्रश्न करेगा
दस्तको और प्रश्नों में ही उलझ जाऊंगा
मै जीवन को जी नही पाउँगा
किसी की मोहब्बत का हश्र यु तो ना हुआ होगा
किसी की मोहब्बत का हश्र यु तो ना हुआ होगा
के हम चाहते रहे उसी को और कह भी नही पाये
खुदा करे दुवा मेरी बारयाब हो जाए
जिस पल भूला दू उसको मेरा दम निकल जाए
उम्र गुज़री है मेरी उसको यादो में
अब तो खुल के मेह बरसे अब तो ख़ुद चले आए
'जानी' मै रात दिन उस पल को ढूंढता हूँ
जब आए वो अपनी मर्ज़ी और मेरी मर्ज़ी जाए
अब तो अरसा हुआ हम उस गली को छोड़ आए
न हम उधर गए न वो इधर आए
के हम चाहते रहे उसी को और कह भी नही पाये
खुदा करे दुवा मेरी बारयाब हो जाए
जिस पल भूला दू उसको मेरा दम निकल जाए
उम्र गुज़री है मेरी उसको यादो में
अब तो खुल के मेह बरसे अब तो ख़ुद चले आए
'जानी' मै रात दिन उस पल को ढूंढता हूँ
जब आए वो अपनी मर्ज़ी और मेरी मर्ज़ी जाए
अब तो अरसा हुआ हम उस गली को छोड़ आए
न हम उधर गए न वो इधर आए
Tuesday, May 12, 2009
सारे वक्त बीत जाते है
सारे वक्त बीत जाते है
चंद लम्हे रह जाते है
जो ता-उम्र दिल के किसी कौने में
बस से जाते है, ठहर से जाते है
उनको जाता देख
येही सोच रहा हूँ
वो मेरी जान लेकर
हस के किधर जाते है
चंद लम्हे रह जाते है
जो ता-उम्र दिल के किसी कौने में
बस से जाते है, ठहर से जाते है
उनको जाता देख
येही सोच रहा हूँ
वो मेरी जान लेकर
हस के किधर जाते है
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