किसी की मोहब्बत का हश्र यु तो ना हुआ होगा
के हम चाहते रहे उसी को और कह भी नही पाये
खुदा करे दुवा मेरी बारयाब हो जाए
जिस पल भूला दू उसको मेरा दम निकल जाए
उम्र गुज़री है मेरी उसको यादो में
अब तो खुल के मेह बरसे अब तो ख़ुद चले आए
'जानी' मै रात दिन उस पल को ढूंढता हूँ
जब आए वो अपनी मर्ज़ी और मेरी मर्ज़ी जाए
अब तो अरसा हुआ हम उस गली को छोड़ आए
न हम उधर गए न वो इधर आए
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